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अब मान जा ना रे जोही (Ab maan ja n re Johi)

रतिहा के गुसीआएं, अब ले बोलत नई अस ।
अब मान जा ना रे जोही, मोर जीयरा जरय। अब मान जा...

कोयली कस बोली, तोर हसी अऊ ठिठोली,
सुने बर रे पिरोहील, मोर मनुवा तरसय । अब मान जा...

चंदा बरन तोर रूप, राहू कस गुस्सा घूप,
लगाय हे रे ग्रहण, अंधियार अस लागय । अब मान जा...

तोर गोरी गोरी गाल, गुस्सा म होगे ह लाल,
तोर गुस्सा  ह रे बैरी, आगी कस बरय । अब मान जा...

होही गलती मोर, मै कान धरव
तोर मया बर रे संगी, मै घेरी घेरी मरव । अब मान जा...


प्रस्तुतकर्ता:
रमेशकुमार सिंह चौहान
नवागढ जिला-बेमेतरा (छ.ग.)

पंथी गीत (Guru Ghashidas)

गुरु घासी दास बाबा,  सत के  अलख जगायें ये धाम म  ।

jaitkhamसत के अलख जगायें ये धाम म ...2

सादा तोर खम्भा बाबा, सादा तोर धजा ,
सादा तोर धजा बाबा, सादा तोर धजा,
सत के धजा फहरायें ये धाम म ।

मनखे मनखे एक होथे, मनखे ल बतायें
मनखे ल बतायें बाबा, मनखे ल बतायें
मनखे  मन के छुवाछूत ल मिटायें ये धाम म ।

प्रस्तुतकर्ता:
रमेशकुमार सिंह चौहान
नवागढ जिला-बेमेतरा (छ.ग.)

परयावरण ( साफ रख चारो कोती )

चारोे कोती तोर रे, का का हे तै देख ।
धरती अगास पेड रूख, हवा पानी समेख ।।
हवा पानी समेख, जेखरे ले जिनगी हे ।
‘पंच-तत्व‘ हा आज, परयावरण कहाय हे ।
करव ऐखर बचाव, आय जिनगी के मोती ।
गंदगी ला बहार, साफ रख चारो कोती ।।

प्रस्तुतकर्ता:
रमेशकुमार सिंह चौहान
नवागढ जिला-बेमेतरा (छ.ग.)