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तुलसी के चौंरा दियना जंजाल होगे रे,

काला बतांव कइसे जियके काल होगे रे,
येद मया के चक्कर म बाराहाल होगे रे।

जनम झन गंवाए कहिेके,
धरम म धियान लगाएंव।
घन मोटियारी आसा मन म,
अटल सोहागिन पाएंव।
मड़वा के पिंयर हरदी पानी लाल होेगे रे,
येद मया के चक्कर म बाराहाल होगे रे।

अंतस म पीरा समागे,
हीरा बासत बासत।
अबिरथा जिनगी बिरथा होगे,
येद रोवत गावत हांसत।
मिठ बोली सतवंतिन के सवाल होगे रे,
येद मया के चक्कर म बारहाल होगे रे।

घर कुरिया परवा छानी,
का धरती आकाशा।
का बहिरासू म हारेंव,
जाने कोन जनम के पासा।
बिच्छल जवानी केे बिच्छल चाल होगे रे,
येद मया के चक्कर म बाराहाल होगे रे।

आंधी बड़ोरा मन ह होगे,
उड़ उड़ ठगे दिन राती।
चंदा सुरूज के हाही समागे,
सुरता जरय बिन तेल बाती।
तुलसी के चौंरा दियना जंजाल होगे रे,
येद मया के चक्कर म बाराहाल होगे रे।


गीतकार
एमन दास मानिकपुरी 'अंजोर'
औंरी, भिलाई 3, जिला दुरूग।
मो.7828953811
Post By : अंजोर

काकर बर मय गाना गावंव, काकर बर अब लिखंव गीत


जेती देखौं तेती भईगे,
दिखथे भाईगे लाल सलाम। 
मरके घलो सरग नई दिखे,
दिखथे भईगे लाल सलाम।

काकर बर मय गाना गावंव,
काकर बर अब लिखंव गीत।
राजनीत के चौपट पासा म,
काकर हार अउ काकर जीत।

कलम कभू कलंक होथे?
लिखथे भईगे लाल सलाम।

तय जा मय आथंव जा जा,
संगे मरबोन ओसरी पारी।
बीता भर पेट के खातिर,
लइकुसहा होगे बन्दूक धारी।

हक बिरता के नारा धरके,
छाती चढ़गे लाल सलाम।

कोलिहा मन सब बघवा होगे,
जब नेता बनगे बेपारी।
थुंक चटैया पिछलग्गू चम्मच,
डंकरत भुंकरत हे अधिकारी।

किसानी बर लहू बोहागे,
धरती भईगे लाल सलाम।


गोड़तरिया इज्जत रौंदागे,
मुड़सरिया चपकागे नोट।
बयान बाजी म बेरा पहागे।
खपगे जिनगी बीतगे गोठ।

तइहा बर बइहा बानी हम,
लइहा भईगे लाल सलाम।

मुंह चपकागे खा पी खाके,
चापलुस के वकालत म।
प्रजातंंत्र सूली चढगिन जब,
यहा दरबारी हालत म।

सुरता भईगे सुख सुमत के,
बिरता भईगे लाल सलाम।

सरग सपना समोखे ठाढ़े,
कमिया नरक ल भोगत हे।
कपटी बैठे मुढ़ी म हमरे,
को जनी का का जोंगत हे?

पुरखा पुरबल के आजादी,
आबादी भईगे लाल सलाम।

बइठे बइठे पांगुर भांजत,
लबरा चांदी काटत हे।
महल अटारी चढ़के दोगला,
भाई भाई ल बांटत हे।

भुंईया के भगवान ठठागे,
ठउका भईगे लाल सलाम।

महतारी बर कोख कपूत के,
पीरा घलोक भारी होगे।
स्वारथ के खातिर दुनिया म,
आंखी देखे लबारी होगे।

चिरहा लंगोटी तक लुलवागे,
आंखी गढ़गे लाल सलाम।

जोग भोग ल छोड़के कवि रे,
लिखो अब ये बानी ल।
रत्नगर्भ म बारूद बिछगे,
गढ़ छत्तीस के जवानी ल।

परन करैया पर के बुध म!
पर के भईगे लाल सलाम।


गीतकार 
एमन दास मानिकपुरी
औंरी, भिलाई3, ​जिला—दुरूग
मो.7828953811
Post By:  अँजोर