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कहावत (Kahawat)

खसु बर तेल नहीं, घोड़सार बर दीया।
पंव म लगाय बर तेल नइ हे, फेर घुड़साल म दीया जलाए बर कहां ले आही?
सारांश यह है कि स्वयं के लिए कुछ नहीं है पर झूठी प्रतिष्ठा के लिए घुडसाल में दीया जलाएगा।


01) . छत्तीसगढ़ (मध्य छत्तीसगढ़ी)


मध्य छत्तीसगढ़ी का संबंध ठेठ छत्तीसगढ़ी है। मध्य छत्तीसगढ़ी को ही छत्तीसगढ़ी का मानक रूप माना जा सकता है। यह मध्य छत्तीसगढ़ राजनांदगॉव, दुर्ग, रायपुर, बिलासपुर, धमतरी क्षेत्रों में बोली जाती है। रायपुर और बिलासपुर की छत्तीसगढ़ी परसर्गों के प्रयोग एवं धातुओं और शब्दो के प्रयोग और व्यर्थ में अंतर मिलता है। रायपुर की छत्तीसगढ़ी में आदरार्थक रूपों में बहुधा धातु के साथ ‘अव’ प्रत्यय संयुक्त होता है,

जैसे - जाहव, खाहव

बिलासपुर की छत्तीसगढ़ी में धातु के साथ व के स्थान पर प्रायः ‘आ’ का प्रयोग होता है, 
जैसा -
जाहा, खाहा,
परसर्गों के प्रयोग में प्रमुख भेद कर्म कारक में दिखायी देता है। रायपुर में इस कारक के लिए बहुत ‘ला’ का प्रयोग होता है,

जैसे - 
मोला - मुझे
तोला - तुझे

बिलासपुर में ‘ला’ के स्थान पर ‘का’ प्रयोग अधिक होता है।

जैसे -
मोका, तोका
संबंध कारक में रायपुर में ‘कर’ का प्रयोग अधिक होता है।

जैसे -
एकर - इसका
ओकर - उसका
बिलासपुर में कर अपेक्षा ‘खर’ का प्रयोग अधिक होता है।

जैसे -
येखर 
वोखर