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मन में मया उपर डर खावै (man me Maya uper dar kha o)

सुनत कान लूटब दहि दूदे। हो! हो! करके लइका कूदे।।
ठौंक बनिहै हरि संग जाबो। चलौ अरे! दहि माखन खाबो।।

ऐसन कहि कहि कूदैं नाचैं। एक बताबैं एक टांचै।।
कहे श्याम तब सुनौ रे भाई। सब झन चढ़ौ रूख में जाई।।

तुमला जब मैं करौं इशारा। कूद-कूद आहौ तब झारा।।
ऐसे हॅस के कृष्ण कहनि जब। येते वोते सखा चढ़िन सब।।

आगू ठाढ भइन हरि जाके। लौठी लिये हॉथ परसा के।।
वोती ले आइन रौताइन। श्याम देख डगडग ले पाइन।।

झर फर सबो कछोरा छोरिन। ढॉकिन मूड़-बॉह ला तोपित।।
ठोठक गइन सब हरि ला देखे। कोंचकन लगिन एक ला एके।।

रेंगें बर आगू में होके। परिस हियाव नहीं कोनो के।
ले दे-के सब चलिन अगारी। सब ले चतुरी राधा प्यारी।।
दू-पंग-चलैं ठोठक फिर जावै। मन में मया उपर डर खावै।।